Uncategorizedइस्तीफे की धमकी देना आलाकमान को ब्लैकमेल करने जैसा

इस्तीफे की धमकी देना आलाकमान को ब्लैकमेल करने जैसा

जयपुर । चर्चित ‘आध्यात्मिक गुरु’ और कांग्रेस नेता आचार्य प्रमोद कृष्णम ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर निशाना साधा है।

आचार्य प्रमोद पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के करीबी माने जाते हैं। रविवार को अपने ट्वीट में आचार्य प्रमोद ने हाल ही में जारी मुख्यमंत्री के बयान पर टिप्पणी करते हुए कहा, “इस्तीफा देने से पहले इस्तीफे की धमकी देना पार्टी हाई कमान को ब्लैकमेल करने जैसा है, मुख्यमंत्री जी।”

दो दिन पहले गहलोत ने एक कार्यक्रम में बयान देते हुए कहा था, “मेरा इस्तीफा पहले से ही सोनिया गांधी के पास है”

आचार्य प्रमोद कृष्णम के इस ट्वीट को कांग्रेस में बढ़ती खींचतान का संकेत माना जा रहा है। यह पहली बार नहीं है, जब पायलट समर्थक कृष्णम ने गहलोत पर निशाना साधा है। इससे पहले भी कृष्णम सचिन पायलट को राजस्थान का मुख्यमंत्री बनाने की मांग खुलकर करते रहे हैं। इस बार उन्होंने पायलट को सीएम बनाने की मांग उठाने के बजाय अशोक गहलोत पर निशाना साधा है।

सचिन पायलट ने पिछले गुरुवार को सोनिया गांधी के साथ बैठक की थी, जिसमें कथित तौर पर राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर द्वारा साझा किए गए फॉर्मूले पर युवा नेताओं को आगे लाने के लिए चर्चा की गई थी। इस दौरान अगले चुनाव की रणनीति पर भी चर्चा हुई।

हालांकि गहलोत ने इन चचार्ओं को अफवाह बताया।

शनिवार को राजस्व सेवा परिषद के सम्मेलन में गहलोत ने कहा था, “अफवाहें चलती रहती हैं। उनकी तरफ आपको ध्यान नहीं देना है। अफवाह चलती है कि सरकार बदल रही है, मुख्यमंत्री बदल जाएंगे। बेफिक्र रहना. मैं वह व्यक्ति हूं, जब 1998 में पहली बार मुख्यमंत्री बना, सोनिया गांधी ने मुझे तीन बार चीफ मिनिस्टर बनने का चांस दिया तो मैंने उस वक्त से उन्हें अधिकृत कर रखा है। मेरा इस्तीफा तो परमानेंट ही उनके (सोनिया गांधी के) पास है।”

गहलोत हाल ही में दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के साथ पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट की मुलाकात के बाद राजस्थान में नेतृत्व परिवर्तन के बारे में चल रही अफवाहों के मद्देनजर बोल रहे थे।

उन्होंने आगे कहा, “आप सोच सकते हैं, बार-बार यह आना नहीं चाहिए कि मुख्यमंत्री बदल रहा है। क्या हो रहा है? जब मुख्यमंत्री बदलना होगा तो किसी को कानों-कान भनक तक नहीं लगेगी। आप निश्चिंत रहें, आप अफवाहों में न पड़ें। दो-तीन दिनों से अफवाह सुन रहा हूं.. फलां यह हो गया, वो हो गया। अफवाह से बिना मतलब लोग भ्रमित हो जाते हैं। गवर्नेंस में फर्क पड़ जाता है।”

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