गुरु कीजै जान के ,पानी पीजे छान के, बनाम लोटा-नूण वाले नेताजी

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उत्तराखंड में विगत कई दिनों से  एक हाथ वाली पार्टी के कई नेता सुर्खियों में बने हुए है, कारण सबका और केंद्र बिंदु एक नेता रहा जिसपर न्यूज़ भी प्लांट करवाई जा रही है और तंज़ भी कसे जा रहे है। मेरे मन मे ख्याल आया कि एकमात्र नेता के पीछे उसके चौथी मंजिल वाले हनकदार पुराने दोस्त अब इतना काहे तंज़ मार कर इस राज्य के एक हाथ वाली पार्टी के भीष्म पितामाह टाइप नेता को शब्दों के तीरो से छेद रहे है। कुछ देर की उधेड़ बून के बाद सारा निष्कर्ष निकाला तो पता चला की इन सब के पीछे लोटा-नूण वाले नेताजी का दिमाग और इशारा था कि पार्टी के भीष्म पितामाह को डैमेज किया जा सके।

अब उनकी मंशा चाहे कुछ भी हो पर लोटा-नूण वाले नेताजी जो आज के युग मे खुद को लोटा लेकर अदालत का न्यायाधीश समझ रहे है अब वो वक़्त नही है कि लोटा-नूण पर सिर्फ शपथ दिलाई जा सके। आपका लोटा सुबह सुबह भीष्म पितामाह ने शौच के लिए अगर खेतो में जाकर इस्तेमाल कर लिया तो आप तो खेतो में पड़े मिलोगे और गोबर को खाद बनने में वक़्त लगता है।

इस वक़्त एक हाथ वाली पार्टी को जन नेता की जरूरत है, अब जो उस जननेता पर तंज़ कस रहे है या उनसे करवाये जा रहे है, वो भी आज जो कुछ भी है, वो बा-दौलत किसके है? जिस वजूद की बात कल वो गू-स्वामी के चार बाय चार स्क्रीन पर कर रहे थे* उसके देखकर बत्तीसी सी फूट रही थी कि गिरगिट से भी ज्यादा तीतर बनने का अभिनय भी जब उनसे नही हो पा रहा है तो उनके जैसे दूसरे गिरगिट को क्यों ना वाकओवर दिया जाये।
उनके लिए और लोटा नूण वाले नेता जी ये जान लो और समझ लो, #गुरु कीजै जान के ,पानी पीजे छान के,

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